Bhagavata Purana (भागवत पुराण) PDF in Sanskrit with Hindi

Bhagavata Purana (भागवत पुराण) PDF in Sanskrit with Hindi

श्रीमद्भागवत पुराण क्या है ?

भागवद पुराण 18 पुराणों में से पाँचवा प्रमुख पुराण है, नारद मुनि जी के प्रेरणा से महर्षि वेदव्यास जी ने समस्त पुराण, वेदांत और वेदों में प्रकाश डालने के बाद श्रीमद्भागवत पुराण लिखा था, इसमें 12 अलग-अलग स्कन्द, 335 अध्याय और लगभग 18 हजार श्लोक शामिल है 

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महर्षि वेदव्यास के बेटे श्री सुखदेव जी ने सर्वप्रथम श्रीमद्भागवत पुराण 'राजा परीक्षित' को सुनाया था, राजा परीक्षित को श्रृंगी ऋषि द्वारा तक्ष्प नाग द्वारा काटने का श्राप मिला था, श्रीमद्भागवत पुराण पढने या सुनने पर हमें भगवान श्री कृष्ण के बचपन के बारे में जानने या सुनने को मिलता है, उसमे बल लीला बहुत ही अद्भुत है 

श्रीमद्भागवत पुराण में भगवानश्री कृष्ण के जन्म लीला, ग्वाल बाल लीला, गोपियों के संग कैसे खेले, माखन चोरी लीला को वर्णित किया गया है, इतना ही नही श्रीमद्भागवत पुराण में कृष्ण प्रेम की अद्भुत गाथा भी वर्णित है, ये वेदव्यास जी का आखिरी ग्रन्थ है, इसको लिखने के बाद वेदव्यास जी कोई ग्रन्थ की रचना नही की

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श्रीमद्भागवत पुराण में भगवान विष्णु के 24 अवतारों को भी बताया गया है, जब-जब धरती पर अत्याचार बढता है, और जब-जब धरती पर अधर्म बढ़ता है और भक्तो का प्रेम और पुकार सीमा से आगे निकल जाता है तब धर्म की स्थापना के लिए धरती पर भगवान को अवतार लेना पड़ता है, श्रीमद्भागवत पुराण में भगवान श्री कृष्ण के सारे लीलाओ के बारे में लिखा गया है,

श्रीमद्भागवत पुराण क्यों पढना चाहिए ?

आज हमारा जीवन बहुत ही व्यस्त हो गया है, ऐसा नही है की पहले के लोगो का जीवन व्यस्त्पूर्ण नही था, लेकिन उनके जीवन में व्यस्तता के साथ ही धैर्य और संतोष भी था, समय के साथ इन्सान की जरूरते भी बदलती गयी, हम सभी जीवन जीने का सही ढंग भूलते जा रहे है, श्रीमद्भागवत पुराण हमें सही जीवन जीने का ढंग सीखाती है
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श्रीमद्भागवत पुराण में हमें जीव जंतु से प्रेम करना सिखाया गया है क्योकि प्रेम ही श्रृष्टि का आधार है, और स्वार्थ इन्सान को विनाश की तरफ ले जाता है, कर्तव्यपूर्ण कर्म में ही जीवन है, श्रीमद्भागवत पुराण हमें बार-बार मरने से बचाती है, जब-जब हमे जीवन का लक्ष्य समझ नही आता तब-तब हमे लक्ष्य हासिल करने के लिए बार-बार जन्म लेना पड़ेगा

श्रीमद्भागवत पुराण पढने से हमे यह शिक्षा मिलती है की जब सब साथ छोड़ देते है, जब आप अपना सबकुछ उस पूर्ण परमात्मा के उपर छोड़ देते है, तब भगवान सही कृष्ण आपके कष्टों के पहाड़ उठा लेते है, और आपकी हर परिस्थिति में रक्षा करते है, श्रीमद्भागवत पुराण में आपके सभी प्रश्नों का जवाब है 



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