Ashtalakshmi Stotram lyrics in Sanskrit , अष्टलक्ष्मी स्तोत्रम् संस्कृत में

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भगवान विष्णु की दिव्य पत्नी लक्ष्मी देवी, दिव्य माँ के असीमित रूपों में से एक है। वह भाग्य, शुभता, पोषण, प्रेम, सौंदर्य और समृद्धि की देवी हैं। मां लक्ष्मी हमारे स्वास्थ्य, परिवार और वित्त को आशीर्वाद देती हैं, लेकिन आध्यात्मिक आकांक्षी के लिए वह साधना-शक्ति (हमारी आध्यात्मिक प्रथाओं को बनाए रखने वाली शक्ति) के रूप में प्रकट होती हैं। हम उससे प्रार्थना करते हैं कि वह हमें आध्यात्मिक प्राप्ति के लिए आवश्यक शुद्ध और उत्तम गुणों के साथ आशीर्वाद दे। माँ लक्ष्मी, खिलने में चमकती हैं।



जानिए अष्टलक्ष्मी के बारे में

देवी लक्ष्मी के आठ रूप हैं जिन्हें अष्ट लक्ष्मी कहा जाता है। देवी लक्ष्मी का प्रत्येक रूप धन के प्रत्येक रूप का प्रतिनिधित्व करता है।

आदि लक्ष्मी
जिसे महा लक्ष्मी भी कहा जाता है, आदि शब्द का अर्थ है पुराना। तो जैसा कि नाम से पता चलता है, लक्ष्मी का प्राचीन रूप। आदि लक्ष्मी का जन्म ऋषि भृगु की बेटी के रूप में हुआ है।

धना लक्ष्मी
देवी लक्ष्मी का यह रूप धन और स्वर्ण का प्रतिनिधित्व करता है।

धैर्य लक्ष्मी
देवी लक्ष्मी का यह विशेष रूप कृषि धन का प्रतिनिधित्व करता है।



गज लक्ष्मी
लक्ष्मी का यह विशेष रूप गाय, बकरी, आदि जैसे पशु धन का दाता है।

संतान लक्ष्मी
लक्ष्मी का रूप जो बच्चों का दाता है।

वीरा लक्ष्मी
लक्ष्मी का रूप जो जीवन में आने वाली समस्याओं पर काबू पाने के लिए साहस और शक्ति प्रदान करने वाला है।

विजया लक्ष्मी
लक्ष्मी का यह रूप केवल लड़ाई में ही नहीं, बल्कि हमारे जीवन की कई समस्याओं में जीत का दाता है।

विद्या लक्ष्मी
लक्ष्मी का रूप जो सभी विज्ञान और कलाओं के ज्ञान का प्रतिनिधित्व करता है, साथ में देवी लक्ष्मी के सभी रूपों को अष्ट लक्ष्मी कहा जाता है।



अष्टलक्ष्मी स्तोत्रम् संस्कृत में

आद्य लक्ष्मी

सुमनस वन्दित सुन्दरि माधवि, चन्द्र सहोदरि हेममये,
मुनिगण वन्दित मोक्षप्रदायिनि, मंजुल भाषिणी वेदनुते।
पंकजवासिनी देव सुपूजित, सद्गुण वर्षिणी शान्तियुते,
जय जय हे मधुसूदन कामिनी, आद्य लक्ष्मी परिपालय माम्।।1।।

धान्यलक्ष्मी

अयिकलि कल्मष नाशिनि कामिनी, वैदिक रूपिणि वेदमये,
क्षीर समुद्भव मंगल रूपणि, मन्त्र निवासिनी मन्त्रयुते।
मंगलदायिनि अम्बुजवासिनि, देवगणाश्रित पादयुते,
जय जय हे मधुसूदन कामिनी, धान्यलक्ष्मी परिपालय माम्।।2।।

धैर्यलक्ष्मी

जयवरवर्षिणी वैष्णवी भार्गवि, मन्त्रस्वरूपिणि मन्त्रमये,
सुरगण पूजित शीघ्र फलप्रद, ज्ञान विकासिनी शास्त्रनुते।
भवभयहारिणी पापविमोचिनी, साधु जनाश्रित पादयुते,
जय जय हे मधुसूदन कामिनी, धैर्यलक्ष्मी परिपालय माम्।।3।।

गजलक्ष्मी

जय जय दुर्गति नाशिनि कामिनि, सर्वफलप्रद शास्त्रमये,
रथगज तुरगपदाति समावृत, परिजन मण्डित लोकनुते।
हरिहर ब्रह्म सुपूजित सेवित, ताप निवारिणी पादयुते,
जय जय हे मधुसूदन कामिनी, गजरूपेणलक्ष्मी परिपालय माम्।।4।।

संतानलक्ष्मी

अयि खगवाहिनि मोहिनी चक्रिणि, राग विवर्धिनि ज्ञानमये,
गुणगणवारिधि लोकहितैषिणि, सप्तस्वर भूषित गाननुते।
सकल सुरासुर देवमुनीश्वर, मानव वन्दित पादयुते,
जय जय हे मधुसूदन कामिनी, सन्तानलक्ष्मी परिपालय माम्।।5।।

विजयलक्ष्मी

जय कमलासिनि सद्गति दायिनि, ज्ञान विकासिनी ज्ञानमये,
अनुदिनमर्चित कुन्कुम धूसर, भूषित वसित वाद्यनुते।
कनकधरास्तुति वैभव वन्दित, शंकरदेशिक मान्यपदे,
जय जय हे मधुसूदन कामिनी, विजयलक्ष्मी परिपालय माम्।।6।।

विद्यालक्ष्मी

प्रणत सुरेश्वर भारति भार्गवि, शोकविनाशिनि रत्नमये,
मणिमय भूषित कर्णविभूषण, शान्ति समावृत हास्यमुखे।
नवनिधि दायिनि कलिमलहारिणि, कामित फलप्रद हस्तयुते,
जय जय हे मधुसूदन कामिनी, विद्यालक्ष्मी सदा पालय माम्।।7।।

धनलक्ष्मी

धिमिधिमि धिन्दिमि धिन्दिमि, दिन्धिमि दुन्धुभि नाद सुपूर्णमये,
घुमघुम घुंघुम घुंघुंम घुंघुंम, शंख निनाद सुवाद्यनुते।
वेद पुराणेतिहास सुपूजित, वैदिक मार्ग प्रदर्शयुते,
जय जय हे मधुसूदन कामिनी, धनलक्ष्मी रूपेणा पालय माम्।।8।।
अष्टलक्ष्मी नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि।
विष्णु वक्ष:स्थलारूढ़े भक्त मोक्ष प्रदायिनी।।
शंख चक्रगदाहस्ते विश्वरूपिणिते जय:।
जगन्मात्रे च मोहिन्यै मंगलम् शुभ मंगलम्।।

।।इति श्रीअष्टलक्ष्मी स्तोत्रं सम्पूर्णम्।।





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