विश्वकर्मा पूजा 2020 : जानिए कब है विश्वकर्मा पूजा, पूजा विधि, पूजा करने का समय

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विश्वकर्मा पूजा क्यों मनाया जाता है ? जानिए भगवान विश्वकर्मा के बारे मे

यह त्यौहार भगवान विश्वकर्मा को समर्पित है, इसी दिन भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था, जिन्हें दिव्य वास्तुकार के रूप में जाना जाता है। भगवान विश्वकर्मा ने ही भगवान कृष्ण की नगरी द्वारका शहर का निर्माण किया था , इन्होने अन्य देवताओं के लिए कई हथियार भी बनाए, इन्होंने ही लंका निर्माण भी किया था,  

ऋग्वेद में, इन्हें "दैवीय शिल्पकार" के रूप में जाना जाता है, इस दिन लोग अपने कंपनियों और कारखानों में ऋषि विश्वकर्मा के साथ औजारों, मशीनों और अस्त्रो-शस्त्रों की पूजा करते है।

Vishwakarma Puja 2020 Date, विश्वकर्मा पूजा 2020 कब है ?

इस साल विश्वकर्मा पूजा 16 सितंबर, बुधवार को मनाई जाएगी, हर साल अश्विनी मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को विश्वकर्मा पूजा (Vishwakarma Puja 2020) की जाती है, शास्त्रों के अनुसार विश्वकर्मा जी का जन्म कन्या संक्रांति के दिन हुआ था. इसी कारण हर साल कन्या संक्रांति पर इनकी पूजा की जाती है ।

यह त्यौहार असम, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा और त्रिपुरा जैसे राज्यों में मनाया जाता है। यह नेपाल में भी मनाया जाता है।

Vishwakarma Puja 2020 Timing, विश्वकर्मा पूजा तिथि और समय 


Drikpanchang.com के अनुसार, संक्रांति 16 सितंबर को शाम 7:23 बजे शुरू होगी। पूजा इसके बाद कभी भी आयोजित की जा सकती है। इस दिन सुबह जल्दी उठिए और स्नान कीजिये और साफ कपड़े पहनकर पूजा पर बैठे।

Vishwakarma Puja Vidhi, विश्वकर्मा पूजा विधि कैसे करे 

  • आज के दिन अपनी गाड़ी, मोटर या दुकान की मशीनों को साफ करें।
  • घर के मंदिर में विष्‍णु जी का ध्‍यान करें और फूल चढाएं।
  • कमंडल में पानी लेकर उसमें फूल डालें और विश्वकर्मा भगवान का ध्यान करें। 
  • जमीन पर आठ पंखुड़‍ियों वाला कमल बनाएं और उसपर सात प्रकार के अनाज रखें।
  • अनाज पर तांबे या मिट्टी के बर्तन के पानी का छिड़काव करें।
  • सात प्रकार की मिट्टी, सुपारी और दक्षिणा को कलश में डालकर उसे कपड़े से ढकें।
  • भगवान विश्‍वकर्मा को फूल चढ़ा और आरती उतारें।

भगवान विश्‍वकर्मा जी की आरती

ॐ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
सकल सृष्टि के कर्ता रक्षक श्रुति धर्मा ॥

आदि सृष्टि में विधि को, श्रुति उपदेश दिया।
शिल्प शस्त्र का जग में, ज्ञान विकास किया ॥

ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नही पाई।
ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्धि आई॥

रोग ग्रस्त राजा ने, जब आश्रय लीना।
संकट मोचन बनकर, दूर दुख कीना॥

जब रथकार दम्पती, तुमरी टेर करी।
सुनकर दीन प्रार्थना, विपत्ति हरी सगरी॥

एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।
द्विभुज, चतुर्भुज, दशभुज, सकल रूप साजे॥

ध्यान धरे जब पद का, सकल सिद्धि आवे।
मन दुविधा मिट जावे, अटल शांति पावे॥

श्री विश्वकर्मा जी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत गजानन स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे॥




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