जानिये हैदराबाद कैसे बना भारत का हिस्सा

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इतिहास 

आज का तेलंगाना क्षेत्र भारत की आज़ादी के वक़्त हैदराबाद रियासत का हिस्सा था. हैदराबाद रियासत का भारत के ब्रिटिश साम्राज्यवाद से स्वतंत्रता हासिल करने के एक वर्ष और एक महीने बाद भारत में विलय हो गया था.
Annexation of Hyderabad to India
हैदराबाद रियासत 
15 अगस्त 1947 से पहले दो तरह के भारत अस्तित्व में थे. पहला, ब्रिटिश, फ्रेंच और पुर्तगाली साम्राज्यों के अधीन भारत, जिस पर इन विदेशी ताक़तों का शासन चलता था. वहीं, जो दूसरा भारत था, वो राजे-रजवाड़ों और स्थानीय शासकों के अधीन आने वाला भारत था. उस वक़्त भारत में 522 रियासतें थीं. हैदराबाद, देश की कुछ बड़ी रियासतों में से एक था.

हैदराबाद रियासत में सबसे ज्यादा हिन्दू थे.

हैदराबाद रियासत के 1948 में भारत में विलय होने से पहले यहां क़रीब दो सदियों से आसफ़ जाही वंश का राज था. हैदराबाद रियासत में तीन भाषाई क्षेत्र थे. तेलंगाना के आठ तेलुगु भाषी, ज़िले, महाराष्ट्र के पांच मराठी भाषी ज़िले और तीन कन्नड़ भाषा बोलने वाले ज़िले. इस रियासत की कुल आबादी में 84 फ़ीसद हिस्सा हिंदुओं का था.

नेहरु के साथ मीर उस्मान अली खान और मेजर जनरल जे एन चौधरी 
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THE HINDU
जबकि 11 प्रतिशत मुसलमान और बाक़ी के जैन धर्म के अनुयायी थे. तो, सामाजिक, भाषाई और सांस्कृतिक नज़रिए से हैदराबाद रियासत विविधता में एकता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का शानदार नमूना थी. ब्रिटिश भारत के मुक़ाबले, रियासतों में भी लोकतांत्रिक व्यवस्था और राजनीति की स्थिति बहुत ख़राब थी. हैदराबाद रियासत भी इसका अपवाद नहीं थी.

निजाम की सेना द्वारा अत्याचार -

जब पूरा भारत भारत 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता दिवस मना रहा था, तब हैदराबाद का निजाम  हैदराबाद देश (वर्तमान तेलंगाना, महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में) का अलग परिदृश्य देख रहा था, जो लोग उस समय के हैदराबाद में आजादी का जश्न मनाने की कोशिश कर रहे थे  उन्हें निज़ाम की पुलिस (जिन्हें रजाकार कहा जाता था) लोगो पर हमला कर रहे थे और राष्ट्रिय ध्वज का अपमान कर रहे थे.
razakars of hyderabad
रजाकार 
यह स्पष्ट था कि हैदराबाद राज्य के शासक और उसके सहकर्मी, स्वतंत्रता का जश्न मनाने के लिए इच्छुक नहीं थे। थाह पाना मुश्किल नहीं है: निज़ाम और उनके इलका न तो खुद को भारतीय मानते थे और न ही ऐसा होना चाहते थे।

निजाम के रजाकार जबरन धर्म परिवर्तन कर रहे थे, हिन्दू मंदिरों को तोड़ रहे थे और वहाँ के तेलगु , कन्नड़ और मराठी जैसी स्थानीय भाषाओं पर प्रतिबन्ध लगाकर उर्दू को बढ़ावा दे रहे थे.

हैदराबाद का भारत में विलय 

इन घटनाक्रमों ने तत्कालीन गृह मंत्री सरदार पटेल को चिंतित किया, जिन्होंने एक स्वतंत्र हैदराबाद को "भारत के दिल में वर्णित किया, जिसे शल्यचिकित्सा से हटाने की आवश्यकता थी।"

इन घटनाओं का समापन सरदार पटेल ने भारतीय सेना को ऑपरेशन पोलो को अंजाम देने के लिए निर्देश देने और अधिकृत करने के लिए किया - एक संक्षिप्त 5-दिवसीय पुलिस एक्शन का कोड नाम जिसने हैदराबाद को निज़ाम के चंगुल से मुक्त कराया। 

यह 13 सितंबर 1948 को शुरू हुआ और 17 सितंबर, 1948 को निजाम के आत्मसमर्पण और तत्कालीन हैदराबाद राज्य की मुक्ति के साथ तेजी से समाप्त हो गया।




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