राष्ट्र सेविका समिति क्या है ?

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राष्ट्र सेविका समिति भारत की स्त्रियों की एक संस्था है जो राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ के ही दर्शन के अनुरूप कार्य करती है , किन्तु यह राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ की महिला शाखा नही है , इसकी स्थापना 1936 में विजयादशमी के दिन वर्धा में हुयी थी , इसकी पहली प्रमुख संचालिका थी "लक्ष्मीबाई केलकर" 
Rashtra Sevika Samiti
Image Credit - Rashtra Sevika Samiti 

राष्ट्र सेविका समिति का कार्य

राष्ट्र सेविका समिति भारत भर से अनेक अनाथ लड़कियों की जिम्‍मेदारी उठाती है और इसके लिए पूरे भारत में समिति के 22 छात्रावास हैं, जहां लड़कियों की शिक्षा से लेकर शादी तक की जिम्‍मेदारी उठाई जाती है। यहां उन्हें पढ़ाकर अपने पैरों पर खड़ा होने में भी मदद की जाती है।
राष्ट्र सेविका समिति प्रार्थना सभा
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इंटरनेट के द्वारा दुनिया भर की जानकारी उपलब्‍ध होने के कारण पढ़ी-लिखी युवतियों में और कॉरपोरेट जगत की महिलाओं में अपनी सांस्कृतिक पहचान और उसके प्रति गौरव भाव की भूख जाग रही है। इसलिए वे ज्यादा संख्‍या में समिति के संपर्क में आ रही हैं। सेविका-भाव से सामाजिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में वे अपना योगदान भी देती हैं। 

हिंदू समाज में पढ़ाई पूरी करने के बाद शादी की उम्र की लड़कियों के लिए पूरा समय समाज को देकर काम करना आसान नहीं है। फिर भी आज समिति की,0 से ज्यादा पूर्णकालिक प्रचारिकाएं हैं। कुछ प्रचारिकाएं सीमित सालों तक समिति में रह कर बाद में गृहिणी बन कर सेविका के नाते आजीवन सक्रिय रहती हैं।

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राष्ट्र सेविका समिति में जो स्वेच्छा से आना चाहे उसका स्वागत है। समिति कभी किसी पर दबाव नहीं बनाती कि उनकी संस्था से जुड़ें। जिनमें सेवा भावना है वे महिलाएं खुद आती हैं।

वर्तमान में राष्ट्र सेविका समिति की 5215 सक्रीय शाखाएं है जिसमे 875 रोजाना संचालित होते है , जिनमे 1 लाख से 10 लाख तक सदस्य है , इसकी 10 देशों में विदेशी शाखाएं हैं, जो हिंदू सेविका समिति नाम का उपयोग करती हैं।

समिति धर्म, जाति, पंथ, संप्रदाय, लिंग या जातीयता के बिना, गरीबों और वंचितों के लिए पूरे भारत में 475 सेवा परियोजनाएं चलाती है। इनमें स्कूल, पुस्तकालय, कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र और अनाथालय शामिल हैं।

राष्ट्र सेविका समिति समाज में सकारात्मक सामाजिक सुधार के नेताओं और एजेंटों के रूप में हिंदू महिलाओं की भूमिका पर केंद्रित है। समिति अपने सदस्यों को तीन आदर्श सिखाती है;

  • मातृवत (सार्वभौमिक मातृत्व)
  • कर्तुत्व (दक्षता और सामाजिक सक्रियता)
  • नेतरुत्व (नेतृत्व)

आरएसएस और राष्ट्र सेविका समिति में अंतर 

दोनों शाखाओं में खेल, शारीरिक-बौद्धिक कार्यक्रम आदि समान ही हैं। संघ और समिति की प्रार्थना अलग-अलग है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं के लिए शाखा में रोज इकट्ठा होना या आना कठिन होता है। इसलिए समिति की शाखाएं रोज की अपेक्षा साप्ताहिक ज्यादा हैं। घर के कामकाज से समय निकालकर आना होता है इसलिए समिति की शाखाओं का समय भी अलग यानी सुबह देर से या अक्‍सर दोपहर या शाम होता है।

राष्ट्र सेविका समिति का दायरा बहुत बड़ा है। पूरे भारत में 3000 हजार शाखाएं हैं। इस समिति की जरूरत इसलिए पड़ी क्‍योंकि महिलाओं के पास सीमित समय था। वे घर की जिम्‍मेदारी संभालने के साथ देश के लिए योगदान देती हैं। यही वजह है कि समिति ने एक ऐसे अलग विभाग के बारे में सोचा जो समाज के लिए योगदान दे सके। क्‍योंकि समिति से जुड़ी सदस्याएं मानती हैं कि शिक्षित समाज ही सुदृढ़ देश की नींव है। 

यदि स्त्रियां जागृत होंगी तो वह परिवार को संस्कार देंगी और संस्कारी परिवार के सदस्य अच्छा देश बनाएंगे। संघ की तरह समिति की भी शाखाएं होती हैं जो प्रतिदिन और साप्ताहिक आयोजित होती हैं। यहां आने वाली सेविकाओं का शारीरिक शिक्षा और बौद्धिक विकास के जरिए आत्मविश्वास बढ़ाने के कार्य किए जाते हैं। 

कार्यक्रम

  • दैनंदिन तथा साप्ताहिक शाखाएँ लगाना। वहां पर सेविकाओंको शारीरिक शिक्षा, बौद्धिक विकास, मनोबल बढाने के लिये विविध उपक्रम शुरू करना।
  • प्रतिवर्ष भारतीय तथा विभाग बैठकों का आयोजन : शिशु-बालिका, युवती, गृहिणी सेविकाओंके लिये।
  • वनविहार और शिविरों का आयोजन - शिशु, बालिका और गृहिणी सेविकाओं के लिए।
  • अखिल भारतीय तथा प्रांत, विभाग स्तरों पर प्रसंगोत्पात संमेलन लेना।
  • अपनत्व की भावना से आरोग्य शिबिर, छात्रावास, उद्योग मंदिर, बालमंदिर संस्कार वर्ग सहित विभिन्न सेवाकार्य करना।
  • विश्व विभाग में हिंदुत्व का प्रसार तथा हिंदु बांधवों का संगठन




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