हिंदुत्व क्या है ? और ये भारत के लिए क्यों जरुरी है, और ये हमें क्या सिखाता है..

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हिंदुत्व क्या है ?


अपनों की रक्षा के लिए और धर्म की रक्षा के लिए परशुराम की तरह धार्मिक संत भी बनना तथा आवश्यकता पड़ने पर अधर्म के विरुद्ध शस्त्र भी उठाना हिंदुत्व है।

राजनीति में चाणक्य की कूटनीति को अपना कर तन, बुद्धि एवं आत्मा को मजबूत बनाना तथा शुद्ध और पवित्र हो कर अपनों की रक्षा करना हिंदुत्व है।

निःस्वार्थ निष्काम चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य जैसे योद्धा बन कर अपने वचनों को पूर्ण करना, तथा धर्मं की रक्षा करना हिंदुत्व है।



हिंदुत्व ने ही विश्व को नागार्जुन के धातुकर्मी एवं  रसायन शास्त्र का ज्ञानी दिया उन्होंने रसरत्नाकर  नामक रसग्रंथ की रचना की, आचार्य भास्कराचार्य ने बीजगणित, अंकगणित, ग्रहगणित तथा गोलाध्याय  जैसे शास्त्र दिए उन्होंने सम्पूर्ण विश्व गुरुत्वाकर्षण शक्ति के बारे में बताया, हिंदुत्व ने ही ऋषि भारद्वाज जैसे विमान शास्त्री दिए, हिंदुत्व ने ही सुश्रुत व चरक जैसे वैध दिए, हिंदुत्व ने ही आर्यभट के रूप में गणितज्ञ दिए, हिंदुत्व ने इस विश्व को शून्य का ज्ञान करवाया, ग्रहों व तारों के गूढ़ रहस्यों को सुलझाया और भी न जाने कितने आविष्कार दिए हैं।

हिंदुत्व सिर्फ देवी देवताओं की पूजा तक सीमित नहीं बल्कि ये मनुष्य को आपस में मिलकर रहना सिखाता है। और माता-पिता को भगवान का स्थान देता है। सिर्फ इतना ही नहीं द्वार पर आया हुआ अतिथि को भी भगवन मानकर उसकी सेवा करना सिखाता है तथा उसकी रक्षा के लिए स्वयं को बलिदान करना सिखाता है।



हिंदुत्वा मात्र मनुष्य को ही नहीं बल्कि जानवरों को भी दुःख न पहुँचना सिखाता है। यहाँ तक की पेड़-पौधों, वायु, अग्नि, जल, आकाश, सूर्य, चंद्रमा व तारों एवं संसार की हर चीज़ में चाहे वो जीवित हो या निर्जीव सबको भगवन का स्थान देकर सम्मान करना सिखाता है।

ॐ द्यौः शांतिरन्तरिक्ष शांतिः पृथ्वी शांतिरापः शांतिरोषधयः शांतिः। वनस्पतयः शांतिर्विश्वे देवाः शांतिर्ब्रह्म शांतिः सर्वँ शांतिः शांतिरेव शांतिः सा मा शांतिरेधि। ॐ शांतिः शांतिः शांतिः।। 

पश्चिम का जीवन दर्शन ये कहता है की यह सृष्टि सिर्फ मानव के सुख के लिए बनी है। पर हिन्दू जीवन दर्शन ये कहता है कि यह सृष्टि सिर्फ मानव के लिए नहीं बनी है। हिन्दू राष्ट्र भारत वो देश है जहाँ सम्पूर्ण सृष्टि, जीव, सजीव और निर्जीव की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है जैसे अंतरिक्ष, पृथ्वी, औषधि, वनस्पति आदि सभी के सुखी होने की कामना की जाती है।

जैसा हमारा परिवेश होगा उसका ही असर हमारे शरीर पर होगा। आज जब अंतरिक्ष में कचरा, मिटटी में जहर, औषधीय वृक्षों एवं वनस्पतियों का लोप तथा प्राणियों की हत्या होने के कारण सम्पूर्ण सृष्टि अशांत है तथा उसका ही प्रभाव मनुष्य के मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य पर दिख रहा है।

यह सत्य सनातन धर्म रीति, वैखरी-वाक् वर्णनातीत।
विधि के हाँथों में पली-बढ़ी, विस्तारित इसकी राजनीति।।
इसके ही पूर्वज सूर्य-चन्द्र-नक्षत्र-लोक-पृथ्वीमाता।
इसकी रक्षा हित बार-बार नारायण नर बन कर आता।।
कितना उज्ज्वल इतिहास तुम्हारा बात न यह बिसराओ।

अपना देश समाज बचाओ, हिन्दू तुम कट्टर बन जाओ।।




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