केवल हिन्दुओ के त्यौहारो पर बैन क्यों? कभी होली पर, कभी जल्लीकट्टू पर, और अब दिवाली।

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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर 31 अक्टूबर तक के लिए रोक लगा दी है। इस बार दिवाली 19 अक्टूबर को है।

इसलिए अगर आप दिल्ली और एनसीआर के आसपास रहते है तो आप दीवाली के दिन पटाखे नही जला पाएंगे, और आप दीवाली पटाखों के बिना मनाएंगे, यानी इन लोगो की दीवाली फीकी हो सकती है।


लेकिन क्या दिवाली के दिन ही पटाखों पर प्रतिबंध लगाकर देश की राजधानी दिल्ली की हवा साफ हो सकती है? क्योंकि दिल्ली की हवा खराब करने में पटाखों के अलावा और काफी सारे वजह है 
तो फिर ऐसे में किसी एक धर्म के त्यौहार पर निशाना क्यों? क्या अदालत ऐसा ही फैसला किसी और धर्म के त्यौहार के खिलाफ दे सकती है ऐसे काफी सवाल है जो अदालत को ध्यान देना चाहिए।


लेकिन बैन सिर्फ हिन्दू त्यौहारो के लिए क्यों?

पटाखों के अलावा प्रदूषण डीजल से भी होता है और डीजल से चलने वाली गाड़ियों से भी होता है ऐसे कई पुरानी गाड़िया आपको मिल जाएगी जो चलने वाली नही है फिर भी दिल्ली की रोड पर दौड़ रही है और प्रदूषण फैला रही है।

दिल्ली में सबसे ज्यादा प्रदूषण रोड के धूल से होता है और उसके बाद मकान, डीजल गाड़िया, होटल, रेस्त्रां, औऱ कंपनियों का भी काफी योगदान होता है तो फिर किसी त्यौहार पर बैन क्यों,
क्या अदालत को बकरीद के दिन हजारो लाखो जानवरो की बलि दिखाई नही देता, जबकि जानवरो के शरीर से निकलने वाले खून से भी काफी प्रदूषण फैलता है।


आजकल हमारे कुछ क्रिकेटर और बॉलीवुड के लोग भी दिवाली को लेकर प्रवचन देने लगे है,
इनको भी समझना चाहिए कि अगर आप अपने शादी में पटाखे छोड़ो तो प्रदूषण नही फैलता अगर आप क्रिसमस और 1 जनवरी को पटाखे फोड़े तो प्रदूषण नही फैलता, बकरीद और ईद इनको अच्छा लगता है, और ये बड़े लोग बकरीद और ईद जैसे त्यौहारो पर सोशल मीडिया पर फ़ोटो डालते है और एन्जॉय करते है हमारे हिन्दू त्यौहारो पर ये पटाखे और होली पर पानी का प्रयोग नही करने की सलाह देते है कैसे है ये लोग, ये लोग बड़े होने के बाद अपने धर्म, समाज और संस्कृति सब भूल जाते है।

क्रिकेटर युवराज सिंह अपना प्रवचन देते हुए.



ये कैसा देश है और कैसा कानून है मुझे समझ नही आता.


कहा गए चूतिये धर्मनिरपेक्ष वाले।




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