3 तरह के भोजन करने का मंत्र ......bhojan mantra in sanskrit with hindi

Bhojan mantra in sanskrit with hindi


भोजन करने का मंत्र..bhojan mantra in sanskrit with hindi

भोजन करने से पूर्व जो मंत्र पढ़े जाते हैं या उच्चारण किए जाते हैं वे मंत्र भोजन मंत्र कहलाते हैं। हमारे भारतीय सनातन संस्कृति के परंपरा में ऐसे तीन मंत्र हैं जिनका उच्चारण भोजन करने के पूर्व किया जाता हैं हम आपको इन्ही तीन मंत्रो को बताएंगे और उसके भावार्थ को भी समझने का प्रयास करेंगे।

भोजन मंत्र

ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम् । 
ब्रह्मैव तेन गन्तव्यं ब्रह्मकर्मसमाधिना ॥

भावार्थ

(जिस यज्ञमें) अर्पण ब्रह्म है, हवन-द्रव्य भी ब्रह्म है, तथा ब्रह्मरूप कर्ताके द्वारा ब्रह्मरूप अग्निमें आहुति देनेकी क्रिया भी ब्रह्मरुप है- उस ब्रह्मकर्मरुप समाधि द्वारा प्राप्त किये जाने योग्य फल भी ब्रह्म ही है

ओ३म् अन्नपते अन्नस्य नो देह्यनमीवस्य शुष्मिणः। 
प्र प्र दातारं तारिष ऊर्जं नो धेहि द्विपदे चतुष्पदे

भावार्थ

हे अन्न के पति भगवन् ! हमे कीट आदि रहित बलकारक अन्न के भण्डार दीजिये अन्न का खूब दान देने वाले को दु:खो से पार लगाईये हमारे दोपायो और चौपायो को बल दीजिये।

ॐ सहनाववतु सहनौभुनक्तु मंत्र हिंदी अर्थ सहित Om Sahana Vavatu Mantra in Hindi

ॐ सहनाववतु।
सह नौ भुनक्तु।
सह वीर्यं करवाव है।
तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषाव है।
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः।।

भावार्थ:

ओम!
हे परमेश्वर!
हम छात्र और शिक्षक दोनों की एक साथ रक्षा करें,
हम छात्र और शिक्षक दोनों का एक साथ-साथ पोषण करें,
हम दोनों साथ मिलकर महान ऊर्जा और शक्ति के साथ कार्य करें एवं विद्या प्राप्ति का सामर्थ्य प्राप्त करें,
हमारी बुद्धि तेज हो,
हम एक दूसरे से ईर्ष्या न करें।

3 तरह के भोजन करने का मंत्र ......bhojan mantra in sanskrit with hindi 5 of 5





0/Post a Comment/Comments

और नया पुराने