कुछ लोग मरने की दुआ अमित शाह के लिए कर रहे थे और निकल लिए राहत इंदौरी,

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देश के मशहूर उर्दू शायर "राहत इन्दौरी" का निधन कोरोना के कारण हो गया, वो कई दिनों से बीमार चल रहे थे, कुछ दिन पहले ही वो कॉरोना पॉजिटिव पाए गए थे, इसकी जानकारी खुद उन्होंने अपनी सोशल मीडिया पर दी थी, उन्होंने आखिरी सांस इंदौर के "अरविंदो हॉस्पिटल" में ली ।


CAA प्रोटेस्ट में हुए थे मशहूर

राहत इंदौरी CAA नागरिकता कानून के खिलाफ हुए प्रोटेस्ट में काफी मशहूर हो गये थे, इस दौरान उन्होंने सरकार विरोधी कई सारे रैलियों में शामिल हुए, और अपने शायरी के सहारे CAA विरोधी लोगो को सरकार के खिलाफ उकसाते रहे , कई जलसों में ये प्रधानमंत्री मोदी पर सीधे वार करते हुए नजर आये थे, CAA प्रोटेस्ट के दौरान इनके कुछ शायरी बहुत प्रसिद्ध हुए ।

CAA नागरिकता कानून किसी भी तरह से भारतीय मुसलमानों के लिए नही था, लेकिन कुछ षड्यंत्र के कारण पुरे देश में इस कानून के खिलाफ प्रदर्शन हुए और दिल्ली जैसा भयंकर दंगा हुआ जिसके कई निर्दोष लोग जान से हाथ धो बैठे, यह कानून पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के हिन्दू, सिख, जैन और बाकि गैर मुस्लिमो के लिए था जिनको पाकिस्तान में प्रताड़ित किया गया था और वो भाग कर भारत में शरण लेने आये थे ।


राहत इंदौरी के शेर जो CAA प्रोटेस्ट में वायरल हुए

  • सभी का खून शामिल है इस मिट्टी में, किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है ।
  • लगेगी आग तो आएंगे घर कई ज़द में यहां पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ा है ।
  • जो आज साहिबे मसनद हैं कल नहीं होंगे  धारदारहैं, ज़ती घर थोड़े हैं।

राहत इंदौरी के चुनिंदा शेर या शायरी

तूफ़ानों से आँख मिलाओ, सैलाबों पर वार करो । 
मल्लाहों का चक्कर छोड़ो, तैर के दरिया पार करो।।

ऐसी सर्दी है कि सूरज भी दुहाई मांगे,
जो हो परदेस में वो वोसे रज़ाई मांगे ।

अपने हाकिम की फकीरी पे तरस आता है,
जो गरीबों से पसीने की कमाई मांगे ।

जुबां तो खोल, नजर तो मिला, जवाब तो दे,
मैं कितनी बार लुटा हूँ, हिसाब तो दे ।

फूलों की दुकानें खोलो, खुशबू का व्यापार करो, 
इश्क़ खता है तो, ये खता एक बार नहीं, सौ बार करो ।

आँख में पानी रखो होंटों पे चिंगारी रखो,
ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो ।


उस आदमी को बस इक धुन सवार रहती है, 
बहुत हसीन है दुनिया इसे ख़राब करूं ।

बहुत ग़ुरूर है दरिया को अपने होने पर
जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियां उड़ जाएं

किसने दस्तक दी, दिल पे, ये कौन है
आप तो अन्दर हैं, बाहर कौन है

ये हादसा तो किसी दिन गुजरने वाला था
मैं बच भी जाता तो एक रोज मरने वाला था

मेरा नसीब, मेरे हाथ कट गए वरना
मैं तेरी माँग में सिन्दूर भरने वाला था




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