अयोध्या के बाद हमारा अगला लक्ष्य ' काशी और मथुरा ' है : अखाड़ा परिषद

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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (ABAP) ने कहा है कि वह अब काशी और मथुरा को "मुक्त" करने पर ध्यान देना चाहेगी। ABAP अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने संवाददाताओं से कहा, "यह गर्व का विषय है कि अयोध्या में एक भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए भूमिपूजन एक लंबी लड़ाई के बाद किया गया है। हम चाहते है कि 'सनातन धर्म' के ध्वज को काशी और मथुरा में भी फहराया जाना चाहिए, जिसके लिए अखाड़ा परिषद संविधान की सीमाओं के भीतर रहकर हर संभव प्रयास करेगा। ”



उन्होंने कहा कि हमारी संस्था जल्द ही काशी और मथुरा के लिए एक आंदोलन शुरू करने और हिंदुओं के लिए महत्वपूर्ण दो महत्वपूर्ण स्थानों को 'मुक्त' करने के लिए योजनाओं पर चर्चा के लिए एक बैठक करेंगे।

अभी कुछ ही दिन पहले, मथुरा में 14 राज्यों के 80 सीरों के साथ कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट को कृष्ण जन्मभूमि को 'मुक्त' करने के लिए स्थापित किया गया है।


ABAP अध्यक्ष ने कहा: "बुधवार को अयोध्या में भूमिपूजन समारोह एक अद्भुत और अनूठा आयोजन था। सनातन धर्म द्वारा ली गई प्रतिज्ञा को पूरा करने की नींव रखी गई है। वर्षों से कारण से जुड़े लोगों के बलिदानों का फल है।"

काशी और मथुरा का विवाद क्या है ?

काशी विवाद : उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित भगवान विश्वनाथ के ओरिजिनल यानी पुराने मंदिर को मुगल आक्रांता औरगज़ेब ने तोड़कर ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण कराया था, यह मस्जिद वाराणसी के दशाश्वमेध घाट के पास है, हालांकि इस मंदिर को कई बार निर्माण कराया गया है, अकबर के समय में राजा मानसिंह ने पुनः निर्माण कराया था ।

मथुरा विवाद : मथुरा के शाही ईदगाह मस्जिद भगवान कृष्ण के मंदिर परिसर से सटा हुआ है जो भगवान कृष्ण की जन्मस्थली है।  दोनों मस्जिदों को पहले से मौजूद मंदिरों को धराशायी करके बनाया गया है।

क्या है सुप्रीम कोर्ट का आदेश : 

सुप्रीम कोर्ट ने अपने 1,045 पेज के फैसले में 11 जुलाई, 1991 को लागू किए गए प्लेसेज ऑफ वर्शिप (विशेष प्रोविज़न) एक्ट, 1991 का जिक्र किया है।  इस मतलब ये हुआ कि आजादी के बाद काशी और मथुरा में जो मौजूदा स्थिति है वही बनी रहेगी।  उन्हें किसी भी तरह का दावा नहीं किया जा सकता है।




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