CAA का विरोध करने वाले 5 विदेशियों को मोदी सरकार ने सुनाया भारत छोड़ने का फरमान

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एक तरफ संसोधित नागरिकता कानून (CAA) को लेकर विरोध-प्रदर्शन जारी है, वहीं केंद्र सरकार ने भी कई मौकों पर यह साफ-साफ बता दिया है कि वह इसे वापस नहीं लेगी। पाकिस्तान, अपगानिस्तान और बांग्लादेश में रहने वाले अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने वाली इस कानून के विरोध में कई विदेशी भी सामने आए। ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन ने इसे वीजा नियमों का उल्लंघन माना और ऐसे 5 विदेशियों को देश छोड़ने के लिए कहा है।

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने आज (तीन मार्च को) को लोकसभा में एक लिखित जवाब में कहा, 'ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन के मुताबिक, पांच विदेशी नागरिक सीएए के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल हुए। यह वीजा नियमों का उल्लंघन है। इन्हें भारत छोड़ने के लिए कहा गया है।'

वहीं, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय ने सीएए पर सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दायर की है। जिनेवा में भारत के स्थाई दूतावास को इसकी जानकारी दी है। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

मंत्रालय ने कहा कि सीएए भारत का आंतरिक मामला है और यह कानून बनाने वाली भारतीय संसद के संप्रभुता के अधिकार से संबंधित है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, 'जिनेवा में हमारे स्थायी दूतावास को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख (मिशेल बैश्लेट) ने सूचित किया कि उनके कार्यालय ने सीएए, 2019 के संबंध में भारत के सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दाखिल की है।'

उन्होंने कहा कि हमारा स्पष्ट रूप से यह मानना है कि भारत की संप्रभुता से जुड़े मुद्दों पर किसी विदेशी पक्ष का कोई अधिकार नहीं बनता है। साथ ही उन्होंने कहा कि सीएए संवैधानिक रूप से वैध है और संवैधानिक मूल्यों का अनुपालन करता है।




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