हाईकोर्ट के जज ने कहा - आजादी के बाद भारत को हिन्दू राष्ट्र होना चाहिए था

Also Read


मेघालय हाईकोर्ट के जज ने सोमवार को कहा है कि बंटवारे के बाद ही भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित कर देना चाहिए था और अगर किसी ने इसे इस्लामिक मुल्क बनाने की कोशिश की तो यह भारत और पूरे विश्व के लिए काला दिन होगा.

जस्टिस एसआर सेन ने आगे कहा, ‘इन चीजों का महत्व केवल श्री नरेंद्र मोदीजी के नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार ही समझ सकती है और इसके लिए उसे ठोस कदम उठाना चाहिए. हमें उम्मीद है कि हमारी मुख्यमंत्री ममताजी राष्ट्रहित से जुड़े इस मुद्दे का समर्थन करेंगी.’
जज ने नागरिकता पर अपनी राय रखते हुए कहा, ‘हर वह व्यक्ति जिसे भारत के संविधान और न्याय व्यवस्था में यकीन नहीं है, वे भारत के नागरिक नहीं माने जा सकते हैं.’ और इस तरह से उन्होंने इस मुद्दे को बंटवारे की तरफ मोड़ दिया.

भारत एक हिंदू राष्ट्र होना चाहिए

जस्टिस सेन ने आगे कहा, ‘जैसा कि हम सब जानते हैं कि भारत विश्व में सबसे बड़ा राष्ट्र था और उस समय पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान जैसा कुछ भी नहीं था. ये सब एक राष्ट्र थे और हिंदू साम्राज्य द्वारा संचालित होता था फिर उसके बाद मुगलों का भारत आगमन हुआ और उन्होंने भारत के विभिन्न क्षेत्रों में जमकर लूटपाट मचाया और उसी समय ढेरों धर्मांतरण कराए गए.’

‘उसके बाद ईस्ट इंडिया कंपनी के नाम पर अंग्रेज भारत आए और भारत पर शासन करना शुरू कर दिया और भारतीयों को इस कदर प्रताड़ित किया कि देश में स्वतंत्रता संग्राम शुरू हो गए और 1947 में भारत आजाद हो गया और इसी के साथ भारत के दो टुकड़े कर दिए गए. एक पकिस्तान और दूसरा भारत.’

‘इस बात में कोई शक नहीं कि बंटवारे के समय लाखों सिखों और हिंदुओं को मौत के घाट उतारा गया, उनको प्रताड़ित किया गया, उनके साथ बलात्कार किया गया और अंत में उन्हें अपनी इज्जत और आबरू बचाने के लिए देश छोड़ने को मजबूर होना पड़ा.’

उन्होंने यह भी कहा, ‘पाकिस्तान ने अपने आप को इस्लामिक राष्ट्र घोषित कर लिया है और भारत, जिसे धर्म के आधार पर बांटा गया था, उसे भी हिंदू राष्ट्र घोषित कर देना चाहिए था, लेकिन वह धर्मनिरपेक्ष बन कर रह गया.’

‘यहां तक कि आज भी पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में रह रहें हिंदुओं, सिखों, जैनों, बौद्धों, इसाइयों, पारसियों, खासी, जयंतिया और गारो समुदाय के लोगों को प्रताड़ित किया जा रहा है और उनके पास कहीं और जाने का चारा नहीं बचा है और जो हिंदू बंटवारे के समय भारत आए, वे आज भी विदेशी समझे जाते हैं, जो कि मेरी समझ में बहुत ही मूर्खतापूर्ण और गैरकानूनी है और सामाजिक न्याय की अवधारणा के विरुद्ध है.




0/Post a Comment/Comments

नया पेज पुराने