पाकिस्तान में हिन्दू, सिख और ईसाई नहीं लड़ सकेंगे चुनाव,

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पाकिस्तान (Pakistan) में अल्पसंख्यकों (Minorities in Pakistan) के खिलाफ भेदभाव किसी से छिपा नहीं है. हाल में सिखों के पवित्र गुरुद्वारे पर हुए हमले के बाद अब एक और चौंकाने वाली खबर सामने आई है. अब मुल्तान बार एसोसिएशन (Multan bar association) ने एक प्रस्ताव पारित किया है, जिसके अनुसार, बार काउंसिल (Bar Council) के चुनाव में कोई भी गैर मुस्लिम हिस्सा नहीं लड़ सकेंगे. इस चुनाव में अहमदिया मुस्लिम उम्मीदवार भी नहीं उतर सकेंगे. मुल्तान की डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के वकीलों की ओर से ये प्रस्ताव लाया गया.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इसमें कहा गया कि चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार को अब एक शपथपत्र भी देना होगा, जिसमें उसे बताना होगा कि उनका विश्वास इस्लाम में है. ये प्रस्ताव ऐसे समय में पास किया गया है, जब पूरी दुनिया में पाकिस्तान अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमले के कारण आलोचना का शिकार हो रहा है. पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के खिलाफ लगातार अपराध की खबरें आ रही हैं. इनमें अल्पसंख्यकों का जबरल धर्मांतरण, महिलाओं से रेप, अपहरण जैसे अपराध हैं. जिन अल्पसंख्यकों के खिलाफ अपराध हो रहे हैं उनमें हिंदू, क्रिश्चियन, सिख, अहमदिया और शिया मुस्लिम भी शामिल हैं.

पिछले दिनों सिख युवक की हुई थी हत्या

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को प्राय: निशाना बनाया जाता रहा है. पिछले दिनों पाकिस्तान में एक सिख युवक की हत्या होने पर विवाद हुआ था. बता दें कि गत चार जनवरी को अज्ञात बंदूकधारियों ने परविंदर सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी थी. भारत ने गत रविवार को इस घटना को अल्पसंख्यक सिख समुदाय के सदस्य की ‘‘लक्षित हत्या’’ करार देते हुए इसकी कड़ी निन्दा की थी. हालांकि बाद में पुलिस ने यह दावा किया था कि परविंदर की हत्या उसी की मंगेतर ने कराई थी. मुस्लिम बहुल पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों की आबादी कुल आबादी की महज दो प्रतिशत है.




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