देश के ये 25 परिवार जिनकी कमाई अरबों में है फिर भी 3 पीढ़ी से ले रहें हैं आरक्षण का लाभ

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छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कुल आरक्षण की सीमा 72 प्रतिशत करने के बाद पूरे देश मे आरक्षण पर फिर से बहस शुरू हो गया है, सामान्य वर्ग के लोग सड़कों पर उतरकर इसके विरोध में जहाँ आंदोलन कर इसे घटाने की माँग कर रहें हैं वहीं आरक्षण के लाभार्थी इस कार्य के लिए छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश सिंह बघेल को बधाई दे रहें हैं. सामान्य वर्ग समुदाय के अलग – अलग संगठन एकजुट होकर पूरे देश मे बड़े आंदोलन में लग गयी हैं वहीं दूसरी ओर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने एकबार फिर से आरक्षण की समीक्षा करने की बात कहकर इस बहस को और तेज कर दिया है.


Reservation

पूरे देश मे जहाँ समय – समय पर विभिन्न समुदायों द्वारा आरक्षण की माँग को लेकर माँग बढ़ते चली आ रही है वहीं आरक्षण के विरोध करने वाले अब इसे पूर्णतः समाप्त करने की वकालत कर रहें हैं लेकिन इस सब के बीच यह जानना बेहद जरूरी हो गया है कि संविधान में पिछड़ों को अग्रिम पंक्ति में लाने के लिए आरक्षण नामक जो व्यवस्था की गयी है उसे उन समुदाय के लोगों को कितना फायदा हुआ है जिनके लिए ये व्यवस्था बनायी गयी है, एक अखबार द्वारा किए गए एक सर्वे से जो रिपोर्ट सामने आया है उससे वर्तमान समय मे आरक्षण की पोल खोलकर रख देता है. असल मे आजादी में 73 वर्ष बीतने के बावजूद आज भी समाज के मुख्यधारा से पिछड़े लोगों की हालात में कोई भी सुधार नहीं देखने को मिला है आरक्षण का लाभ वही लोग आज भी उठा रहे हैं जिनकी स्थिति काफी बेहतर है.


mohan Bhagwat

अखबार द्वारा एससी-एसटी वर्ग के आरक्षण की नीति का विश्लेषण किया गया तो पता चला कि देश में बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं, जो करीब तीन-तीन पीढ़ियों से आरक्षण का लाभ ले रहे हैं. पड़ताल में हमें ऐसे कई मामले मिले। हमने यहां ऐसे 10 प्रतिनिधि परिवारों का ही जिक्र किया है. हालांकि सरकार का कहना है कि उसके पास अभी ऐसा कोई जरिया नहीं है कि जिससे पता चल सके कि किसे कितना फायदा मिला.लेकिन विषय विशेषज्ञों का दावा है कि करीब 90 फीसदी ऐसे पिछड़े परिवार हैं जो एक बार भी इसका उचित लाभ नहीं ले पाए हैं.
अखिल भारतीय सिविल एवं प्रशासनिक सेवा परिसंघ के पूर्व अध्यक्ष हरदेव ने बताया कि देश में एससी व एसटी कैटेगरी के ऐसे कई ए क्लास ऑफिसर हैं जिनकी कई पीढ़ियां रिजर्वेशन का फायदा ले चुकी हैं और अभी भी ले रही हैं. शिक्षा में आरक्षण, सरकारी नौकरी में आरक्षण और सांसद व विधायक के लिए रिजर्व सीट का प्रावधान रखा गया है. एससी वर्ग से आईएएस और सांसद बनने वाले करीब 90 फीसदी ऐसे लोग हैं जिनकी पिछली पीढ़ी ने रिजर्वेशन का लाभ किसी न किसी रूप में लिया होता है. इस कारण उनके ही वर्ग से 95 फीसदी वंचित लोगों को अभी भी एक बार भी आरक्षण का लाभ नहीं मिला है.



ramvilas paswan

सिर्फ एससी-एसटी में नहीं है क्रीमीलेयर: ओबीसी के लिए उच्च शिक्षा और नौकरी में 27 प्रतिशत आरक्षण का नियम है. लेकिन इसका फायदा उन्हें ही मिलता जो क्रीमीलियर में नहीं आते हैं यानी उनकी या उनके पिता की वार्षिक आय आठ लाख रुपए से कम हो. वहीं एसटी का 7.5 और एससी का 15 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान उच्च शिक्षा और सरकारी नौकरी में है. वहीं इस वर्ग के लिए लोकसभा, विधानसभा और नगर पालिका में चुनाव लड़ने के लिए आरक्षित सीट रखी गई है. इनके लिए किसी भी प्रकार का क्रीमीलियर का नियम नहीं है. शहीदों पर आश्रित परिजन के लिए भी आरक्षण का प्रावधान है। लेकिन ये दोनों ही प्रकार के रिजर्वेशन सिर्फ एक पीढ़ी तक ही दिया जाता है.

उन परिवारों के नाम जो कई जनरेशन से ले रहे हैं फायदा
  1. जगजीवन राम परिवार (बिहार)
  2. डाबी परिवार (दिल्ली)
  3. गावित परिवार (महाराष्ट्र)
  4. प्रसाद परिवार (उत्तरप्रदेश)
  5. सिंह परिवार (उत्तरप्रदेश)
  6. बौद्ध परिवार (मध्यप्रदेश)
  7. चौधरी परिवार (पंजाब)
  8. कश्यप परिवार (छत्तीसगढ़)
  9. भेड़िया परिवार (छत्तीसगढ़)
  10. बंसीवाल परिवार (राजस्थान)
इस परिवार के 25 से ज्यादा सदस्य राजनीति-अफसरशाही में हावी राजस्थान के बामनवास गांव से निकला श्रीनारायण मीणा का परिवार करीब 40 साल से पॉवर में है। वे सरपंच थे। मीणा समाज को प्रदेश में एसटी आरक्षण प्राप्त है। इस कुटुंब से निकले परिवारों मेें 25 से ज्यादा लोग राजनीति और अफसरशाही में हावी रहे हैं. परिवार के नमोनारायण मीणा आईपीएस रहे। बाद में केंद्र में मंत्री रहे। हरीश मीणा डीजीपी रहे। एसटी की रिजर्व सीट पर चुनाव भी लड़ा। ओपी मीणा भी मुख्य सचिव थे।

जगजीवन राम उपप्रधानमंत्री रहे रिजर्व सीट से लड़ते थे. 30 से ज्यादा वर्षों तक मंत्री रहे।

mira kumar

टीना डाबी जो आरक्षण के सहायता से आईएस बनी उनके माता – पिता सहित दादा भी आरक्षण के सहारे से आईएस थे। माणिकराव होडल्या गावित 8 बार नंदूरबार से सांसद रहे। यूपीए-2 में मंत्री भी रहे।वरिष्ठ कांग्रेस नेता माता प्रसाद केंद्रीय मंत्री रहे और राज्यपाल रहे। देवी सिंह अशोक आईपीएस अफसर रहे। इनके बेटे भी आईपीएस अफसर हैं। 1952 में हरदास अहिरवार ने सेवढा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था, हार गए थे।

स्व. मास्टर गुरबंता सिंह जालंधर की करतारपुर (रिजर्व) सीट से कांग्रेसी विधायक रहे। स्व. बलीराम कश्यप, (एसटी) बस्तर की रिजर्व सीट से चार बार सांसद रहे। स्व. झुमुकलाल भेड़िया डौंडीलोहारा से छह बार विधायक रहे, मंत्री भी बने। सोहनलाल बंसीवाल एक बार दूदू और दूसरी बार दौसा की रिजर्व सीट से विधायक बने। दूसरी पीढ़ी इनकी पुत्री मीरा कुमार 5 बार सांसद रहीं। आईएफएस और लोकसभा स्पीकर भी रहीं।

नंदकिशोर के बेटे जसवंत ने यूपीएससी (इंडियन इंजीनियरिंग सर्विसेज) परीक्षा पास की थी। बेटी निर्मला नाशिक की इगतपुरी (एसटी) सीट से 2 बार विधायक रही हैं । बड़े बेटे केशव इनकम टैक्स कमिश्नर, मझले बेटे डॉ सर्व प्रकाश भास्कर सीएमओ हैं।

पुत्र बीपी अशोक आईपीएस हैं। बहू मंजू अशोक सरकारी अधिकारी हैं। पुत्र महेंद्र बौद्ध तीन बार सेवढा (रिजर्व) से विधायक रहे। गृह मंत्री भी रहे। एक बेटे संतोख सिंह मौजूदा सांसद हैं। दूसरे बेटे स्व. जगजीत सिंह मंत्री रहे थे। जगजीवन राम के बेटे सुरेश की बेटी मेधावी कीर्ति झज्जर (रिजर्व) से विधायक रहीं। जसवंत की बेटी टीना आईएस बनीं। पहली बार एससी कैंडीडेट ने टॉप किया। निर्मला की बेटी नयना ने 2017 में नाशिक (रिजर्व) जिला परिषद के लिए चुनाव लड़ा था। डॉ सर्व प्रकाश के बेटे प्रियदर्शी रंजन एमसीएच, छोटे बेटे डॉ रवि चेस्ट स्पेशलिस्ट हैं। बीपी अशोक की बेटी डाॅ. अवलोकिता और दामाद डॉ. योगेश भी आईएएस हैं।

बौद्ध की बेटी कुहू 2015 में दतिया (रिजर्व) से जिला पंचायत सदस्य चुनी गईं। संतोख के बेटे बिक्रम चुनाव लड़े, हारे। जगजीत के बेटे सुरिंदर अभी एमएलए हैं। दिनेश और केदार के बच्चे अध्ययनरत, प्रवेश व छात्रवृत्ति में आरक्षण का लाभ लिया है। इनके दो बेटों ने पढ़ाई के समय प्रवेश और छात्रवृत्ति में आरक्षण का लाभ लिया।

2018 में सिकराय सीट से जियालाल के बेटे विक्रम रिजर्व सीट से चुनाव हार गए




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