2006 में हुए कश्मीरी हिन्दुओ के डोडा नरसंहार की कहानी

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30 अप्रैल की वो डरावनी रात जिसे जम्मू रीजन के "डोडा" और "उधमपुर" के हिन्दू कभी भूल नही सकते , ये रात काफी डरावनी थी , कुछ लोग जब याद करते है तो रोने लगते है और उन्हें डर लगने लगता है कही वो इस्लामिक आतंकवादी फिर से हम पर हमला न कर दे. ये हमला सुनियोजित था.

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29 अप्रैल 2006 

29 अप्रैल 2006 को "उधमपुर" के बसंतगढ़ में हिन्दू समाज के 9 लोगो को इस्लामिक आतंकवादियों ने किडनैप कर लिया और फिर उनका कुछ पता नही चला , पुलिस उन्हें ढूढती रही , फिर अगले दिन 30 अप्रैल को इस्लामिक आतंकवादियों ने लाइन में खड़ा करके इन्हें गोलियों से भून दिया , फिर उनकी लाश पास के ही "लोलन गला" गाँव से बरामद हुयी. 
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हमले के बाद गुलाम नबी आजाद परिवारों से मिलने गये थे.


30 अप्रैल 2006 

ये दिन हिन्दू समाज के लिए एक काला दिन कह सकते है , उधमपुर की घटना वाले दिन ही ये घटना हुयी थी, रात के 2:30 बजे आतंकवादी भारतीय सेना की ड्रेस में आये थे , लोगो को लगा ये सेना के जवान है कुछ पूछताछ के लिए आये होंगे, लेकिन लोग ग़लतफ़हमी में थे , 
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धर्म पूछकर मारा गया 

जब रात के 2:30 बजे आतंकवादी डोडा जिले के कुलहंद गाँव में पहुचे और फिर गाँव में पहुचकर सबको धर्म पूछकर घर से बाहर निकाला , उसमे जो हिन्दू थे उनको बाहर निकालकर लाइन में खड़ा किया और फिर इस्लामिक आतंकवादियों ने 22 हिन्दुओ को गोलियों से भून दिया, जिसमे एक 3 साल की छोटी बच्ची भी थी.

ग्रामीणों ने घायलों को डोडा के जिला अस्पताल में पहुंचाया क्योंकि गांव सड़क से तीन घंटे का था।
इन दोनों नरसंहार को मिलकर कुल 35 हिन्दू मारे गये थे.



लश्कर ने ली जिम्मेदारी..

इस घटना के बाद पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन "लश्कर ए तोयबा" ने इसकी जिम्मेदारी ली .

घटना की वजह 

कश्मीर घाटी में अलगाववादियों ने चुनाव बहिष्कार का ऐलान किया था , चुनाव बहिष्कार के बावजूद जम्मू रीजन के हिन्दुओ ने चुनाव में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया था जिसका खामियाजा उन्हें एक नरसंहार के रूप में भुगतना पड़ा..

घटना के बाद जम्मू समेत पुरे भारत में था आक्रोश 

एक चश्मदीद गवाह राकेश कुमार कहते है कि आतंकवादियों ने सुबह करीब 12.30 बजे उनके दरवाजे पर दस्तक दी और उनके बड़े भाई को उनके साथ जाने के लिए कहा। उन्होंने कुछ समय बाद गोलियों की आवाज सुनी और उनके भाई को गंभीर चोटें आईं।

घटना के समय गांव के आसपास कोई पुलिस चौकी नहीं थी क्योंकि ये लोग विस्थापित हिन्दू थे जो कुछ साल पहले ही इन्हें स्थापित किया गया था, घटना वाले जगह से कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित आर्मी कैंप था।

घटना के विरोध में डोडा और जिले के अन्य कस्बों में पूर्ण बंद का आयोजन किया गया। छात्रों ने जम्मू विश्वविद्यालय और अन्य संस्थानों में कक्षाओं का बहिष्कार किया। बीजेपी के कई नेता डोडा पहुंचे थे.


पुरे विश्व में हुयी थी इस घटना की निंदा..

इस घटना की निंदा पुरे विश्व में हुयी , इस घटना के बाद आस्ट्रेलिया सरकार ने लश्कर ए तैयबा को आतंकवादी संगठन घोषित किया था.

References -




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