भारत के अंडर-17 फुटबॉल टीम के कप्तान:- मां ने मछली बेचकर बेटे को फुटबॉलर बनाया ,पिता एक छोटे से किसान है। बेटा अब करेगा देश का नाम रौशन.

Also Read

परिंदो को नही तालीम दी जाती उड़ानों की, वो खुद ही सिख लेते है बुलंदी आसमानो की।

किसी शायर के इस नाजुक कलम को मजबूत इरादों के साथ सच साबित करने के लिए तैयार है "अमरजीत सिंह"

भारतीय अंडर-17 फुटबॉल टीम के कप्तान "अमरजीत सिंह कियम" का नाम शुक्रवार को इतिहास के पन्नो में दर्ज हो गया, जब वो भारत की पहली फीफा अंडर-17 विश्व कप टूर्नामेंट में भारत का नेतृत्व किया।
"भारत का पहला मैच शुक्रवार को USA से होना है"

अमरजीत सिंह की कहानी मणिपुर में एक विन्रम पृष्टभूमि के साथ शुरू हुई थी, मणिपुर में जन्म के बाद इनके चाचा ने परवरिश की उसके बाद चंडीगढ़ फुटबॉल अकादमी में ट्रेनिंग के लिए दाखिला दिलाया, अमरजीत ने अंडर-19 विश्व कप के लिए भारतीय टीम के परीक्षण के दौरान चयनकर्ताओ का ध्यान अपनी ओर खींचा।

अमरजीत सिंह के पिता "मणि सिंह कियम" एक छोटे से किसान और खाली समय में बढ़ई का काम भी करते है,
उनकी माँ अशांगबी देवी 25 किलोमीटर दूर जाकर मछली बेचती है और रोजाना 250-300 रुपये प्रतिदिन कमाकर अपने परिवार का पालन पोषण करती है ।


बेटे की इस कामयाबी पर माँ बहुत खुश है और कहती है, पूरी जिंदगी गरीबी में कटी, आज हमे अपने बेटे पर नाज है जिसके बलबूते पर हमारा परिवार पहली बार जहाज में बैठा, स्टेडियम में हमे अपनी आंखों के सामने बेटे को खेलते हुए देखने का मौका मिलेगा।
यह बात एक सपने सच होने जैसा है।


"अमरजीत तीन भाइयों में सबसे छोटे है।"


इस टूर्नामेंट में भारतीय टीम को ग्रुप ए में रखा गया है इसमें अमेरिका, कोलंबिया, और पूर्व चैंपियन घाना है।




नया पेज पुराने